विशेष रिपोर्ट

किशोरों में चिंताजनक मानसिक स्थितियां पैदा कर रहे है वायु प्रदूषण :रिपोर्ट

किशोरों में चिंताजनक मानसिक स्थितियां पैदा कर रहे है वायु प्रदूषण :रिपोर्ट

एजेंसी 

सिडनीः नई पीढ़ी के युवा और खासतौर से किशोर आसानी से और ज्यादा संख्या में निराश होते जा रहे हैं. रिश्तों को बनाए रखने में उनको दिक्कतें पेश आ रही हैं या वे स्वयं को उपेक्षित अथवा ज्यादा आक्रामक पा रहे हैं। ऐसा वायु प्रदूषण की वजह से भी हो सकता है। यह दावा किया गया है स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा अमेरिकी साइकोसोमैटिक सोसाइटी के जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में जिसके अनुसार प्रदूषण का असर केवल स्वास्थ्य पर ही नहीं हो रहा बल्कि यह किशोरों में चिंताजनक मानसिक स्थितियां पैदा का रहा है।

अध्ययनकर्ता जोनस जी मिलर के अनुसार पहले से तनाव से गुजर रहे किशोरों को प्रदूषण स्थितियां और बिगाड़ रहा है। अध्ययन के दौरान किशोरों को शारीरिक व मानसिक परीक्षण से गुजारा गया, उनके हृदय की गति और त्वचा की इलेक्ट्रोडर्मल गतिविधि को मापा गया। उनके रहन-सहन और स्वभाव को लेकर कई प्रश्न भी किए गए। जिन जगहों पर वे रह रहे हैं, वहां के पीएम 2.5 प्रदूषक तत्व के स्तर का रिकॉर्ड अध्ययन में शामिल किया गया।

वे जगहें जहां पीएम 2.5 का स्तर अधिक है, इनमें रह रहे किशोरों में नकारात्मक मानसिक स्थितियां अधिक मिली। उनमें चिंता और अवसाद के लक्षण अधिक थे। सामाजिक व्यवहार और स्वभाव के मामले में भी वे अधिक असंतुलित मिले। निष्कर्ष में कहा गया कि किशोरों के बढ़ते हुए शरीर और सेहत पर वायु प्रदूषण नकारात्मक असर डाल रहा है। इसकी वजह से उनकी शारीरिक के साथ-साथ मानसिक वृद्धि को भी नुकसान हो रहा है।

भारत के लिए चेतावनी

एक ओर जहां भारत किशोरों और युवाओं की संख्या के मामले में विश्व का सबसे बड़ा देश माना जा रहा है, वहीं समय-समय पर जारी वायु प्रदूषण के आंकड़ों के अनुसार विश्व के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में हमारे 10 से 13 शहर तक शामिल होते हैं। हमारी नई पीढ़ी के मानसिक स्वास्थ्य पर यह वायु प्रदूषण नकारात्मक प्रभाव दिखा सकती है

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