विशेष रिपोर्ट

विकास यात्रा 2018 पर विशेष : विकास यात्रा: छत्तीसगढ़ के स्वर्णिम भविष्य निर्माण की यात्रा

विकास यात्रा 2018 पर विशेष : विकास यात्रा: छत्तीसगढ़ के स्वर्णिम भविष्य निर्माण की यात्रा

आलेख: स्वराज कुमार

  लोकतंत्र में जनता का विश्वास ही किसी भी निर्वाचित सरकार की सबसे बड़ी ताकत होती है। जनता का विश्वास कायम रखने के लिए लोगों से निरंतर संवाद बनाए रखना बहुत जरूरी होता है। परस्पर संवाद से ही कोई भी शासन ‘सुशासन’ में तब्दील होता है। प्रजातंत्र में जनता के लिए, जनता के द्वारा चुनी हुई सरकार खामोश होकर नहीं बैठ सकती। वह अपनी जनता की बेहतरी के लिए और अपने राज्य और देश के स्वर्णिम भविष्य के लिए जनता के सहयोग से विकास के सभी कार्य करती है। जनता के खजाने से राज्य की तरक्की और नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए जो भी कार्य सरकार की ओर से हो रहे हैं, अपनी जनता के पास जाकर उनका हिसाब देना किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की सामाजिक जिम्मेदारी होती है। यह बहुत चुनौती भरा और साहस का काम होता है।
    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने जनता के पास जाकर अपनी सरकार के कार्यों का हिसाब देने की चुनौती को हिम्मत के साथ स्वीकारा है। उन्होंने अपने सरकारी तंत्र को मंत्रालय और दफ्तरों से निकालकर विभिन्न अभियानों के जरिए चौक-चौराहों और चौपालों तक प्रदेशवासियों के बीच पहुंचाया है, ताकि लोगों के साथ संवाद की निरंतरता बनी रहे। प्रदेश का हर गांव, हर शहर, हर गरीब और हर किसान  सरकार और जनता के बीच संवाद के इस केन्द्र में है। मुख्यमंत्री हर महीने प्रदेश के लगभग हर जिले का दौरा करते हैं। वर्ष 2005 से उन्होंने ग्राम सुराज अभियान की शुरूआत की। उनके नेतृत्व में वर्ष 2012 में ग्राम सुराज के साथ नगर सुराज अभियान चलाया गया और वर्ष 2015 से उन्होंने ग्राम सुराज और नगर सुराज दोनों को मिलाकर लोक सुराज अभियान का आगाज किया। गर्मियों के आग उगलते मौसम में ये तीनों ही अभियान मुख्यमंत्री के एक नये प्रयोग के रूप में राज्य और देश में काफी लोकप्रिय हुए हैं। वर्तमान में लोक सुराज अभियान 2015 से लगातार चल रहा है। इसके साथ ही लगभग हर पांच साल में उनके नेतृत्व में विकास यात्राएं भी हो रही हैं। वर्ष 2008 और 2013 के बाद वर्ष 2018 में विकास यात्रा दो चरणों में 12 मई से 11 जून तक और 16 अगस्त से 30 सितम्बर तक चलेगी।
     ग्राम सुराज की तर्ज पर लोक सुराज अभियान में भी मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रियों तक और मुख्य सचिव और कलेक्टर से लेकर पटवारी तथा ग्राम और शहर स्तर के सभी मैदानी अधिकारी और कर्मचारी एक समयबद्ध अभियान के तहत जनता के बीच जाते हैं। शिविर लगाकर और चौपालों में बैठकर उनकी समस्याएं सुनते हैं और यथासंभव उनका त्वरित निराकरण भी किया जाता है। लोगों को विभिन्न योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें पात्रता के अनुसार उन योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए भी ठोस पहल की जाती है। इस बीच डॉ. सिंह ने सितम्बर 2015 से हर महीने के दूसरे रविवार को आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र से ‘रमन के गोठ’ कार्यक्रम के जरिए भी जनता को सरकार की योजनाओं के बारे में बताते हैं। रेडियो वार्ता का उनका यह मासिक कार्यक्रम काफी लोकप्रिय हुआ है।
    जनता की जरूरतों को समझकर जनकल्याण की योजनाएं बनाने में मुख्यमंत्री के लिए ग्राम सुराज, नगर सुराज और लोक सुराज अभियान और विकास यात्राओं का योगदान काफी महत्वपूर्ण रहा। इन अभियानों के दौरान चौपालों में और जनसभाओं में आम जनता से बातचीत में ही मुख्यमंत्री को कई नवीन योजनाओं का विचार आया। डॉ. रमन सिंह के अनुसार वर्ष 2012 में छत्तीसगढ़ सरकार ने विधानसभा में विधेयक लाकर राज्य के गरीबों को भोजन का अधिकार दिलाने के लिए देश का पहला खाद्य-सुरक्षा और पोषण सुरक्षा कानून बनाया। इस कानून के अनुसार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन दुकानों से गरीबों को सिर्फ एक रूपए किलो में राशन कार्ड पर हर महीने प्रति यूनिट सात किलो चावल दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री बाल हृदय सुरक्षा योजना हृदय रोग से पीड़ित हजारों बच्चों के लिए वरदान साबित हो रही है। गरीब परिवारों की विवाह योग्य बेटियों की शादी में मदद के लिए मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत 70 हजार से ज्यादा बेटियों ने सामूहिक विवाह समारोहों में गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया है। किसानों को सिंचाई के लिए प्रतिवर्ष अधिकतम 7500 यूनिट बिजली निःशुल्क देने के लिए कृषक जीवन ज्योति योजना सफलतापूर्वक चल रही है और चार लाख से ज्यादा किसान इसका लाभ ले रहे हैं। सरस्वती साइकिल योजना के तहत हाईस्कूलों में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की बालिकाओं सहित सामान्य और पिछड़े वर्गों के गरीब परिवार की बालिकाओं को निःशुल्क साइकिल दी जा रही है। सरगुजा और बस्तर के लिए आदिवासी विकास प्राधिकरण बनाया गया है।
    राज्य में अनुसूचित जाति बहुल जिलों और क्षेत्रों के लिए अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण की स्थापना की गई है। ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण भी बनाया गया है। नक्सल हिंसा पीड़ित इलाकों के बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए मुख्यमंत्री बाल भविष्य सुरक्षा योजना की शुरूआत करते हुए राजधानी रायपुर सहित जगदलपुर, अम्बिकापुर, बिलासपुर और दुर्ग में प्रयास आवासीय विद्यालयों की स्थापना की गई, जहां 11वीं और 12वीं कक्षा के बच्चों को नियमित पढ़ाई के साथ-साथ मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग दी जा रही है। अब तक कई बच्चों ने इस सुविधा का लाभ लेकर आईआईटी, एनआईटी जैसी उच्च तकनीकी शिक्षा संस्थाओं में और मेडिकल तथा इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश लिया है और अपने सुनहरे भविष्य का निर्माण कर रहे हैं। मुख्यमंत्री को इस योजना का विचार भी ग्राम सुराज अभियान के दौरान आया था। तेंदूपत्ता श्रमिकों को निःशुल्क चरण पादुका वितरण की योजना, उनके पारिश्रमिक को 450 रूपए प्रति मानक बोरा से क्रमशः बढ़ाकर वर्ष 2018 में ढ़ाई हजार रूपए प्रति मानक बोरा किया जाना भी इन अभियानों की देन है।    

हमारे सभी कार्य खुली किताब की तरह: डॉ. रमन सिंह

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    विकास यात्राओं में गांव-गांव और शहर-शहर लोगों से सीधे सम्पर्क और संवाद के जरिए भी मुख्यमंत्री ने कई योजनाओं की परिकल्पना करते हुए उन्हें धरातल पर साकार किया है। वे कहते हैं- छत्तीसगढ़ सरकार के सभी कार्य खुली किताब की तरह जनता के सामने हैं। उनकी सरकार प्रदेश के विकास और जनता की बेहतरी के लिए अपने हर वायदे को पूरा किया है। जिस भरोसे के साथ राज्य की जनता ने हमें छत्तीसगढ़ की सेवा का अवसर दिया, जनता के उस विश्वास को हम टूटने नहीं देेंगे। आदरणीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस अंचल को क्षेत्रीय असंतुलन और पिछड़ेपन की पीड़ा से मुक्ति दिलाने के जिस संकल्प के साथ वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किया, उनके उस संकल्प को साकार करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयास निरंतर जारी हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार यह छत्तीसगढ़ के स्वर्णिम भविष्य निर्माण की यात्रा है।

सरकार और जनता के परस्पर संवाद से बनती हैं योजनाएं

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    डॉ. रमन सिंह का यह भी कहना है कि मंत्रालयों और सरकारी दफ्तरों के वातानुकूलित कमरों में बैठकर जनता की जरूरतों का सही-सही आंकलन नहीं किया जा सकता। इसके लिए जनता के बीच जाना जरूरी होता है और यह किसी भी लोकतंत्र में सरकारी तंत्र की पहली जिम्मेदारी होती है। ग्राम सुराज, नगर सुराज और अब लोक सुराज अभियान का भी यही उद्देश्य है। इसी भावना के साथ-साथ जनता से जुड़कर सीधे संवाद के इन अभियानों के बीच मुख्यमंत्री के नेतृत्व में वर्ष 2008 और वर्ष 2013 में प्रदेशव्यापी विकास यात्रा का भी आयोजन किया गया। विकास यात्रा के जरिए भी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचा जा सकता है। हर इलाके में यात्रा के हर पड़ाव में काफी संख्या में किसानों, मजदूरों, छात्र-छात्राओं और समाज के सभी वर्गों के लोगों से मुलाकात हो जाती है। उनकी समस्याओं और जरूरतों के बारे में जनप्रतिनिधियों, आम नागरिकों से मौके पर ही चर्चा हो जाती है और जरूरतमंद लोगों और क्षेत्रों के विकास के लिए नई कार्य योजनाओं का ढांचा भी तैयार किया जा सकता है। काफी संख्या में नये निर्माण कार्यों का भूमिपूजन और शिलान्यास तथा पूर्ण हो चुके निर्माण कार्यों का लोकार्पण भी होता है।
     मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पहली विकास यात्रा की शुरूआत 23 मई 2008 को और दूसरी विकास यात्रा की शुरूआत 6 मई 2013 को राज्य के राज्य के बस्तर संभाग के जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा से की गई। वहां छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध तीर्थ दंतेश्वरी माता के ऐतिहासिक मंदिर में पूजा-अर्चना और प्रदेश वासियों की सुख-समृद्धि की कामना के साथ इन यात्राओं का शुभारंभ हुआ। इस बार भी मुख्यमंत्री दंतेवाड़ा में दंतेश्वरी माता का आशीर्वाद लेकर विकास यात्रा की शुरूआत करने जा रहे हैं। वर्ष 2008 और 2013 में मई-जून के दहकते मौसम में विभिन्न चरणों में आयोजित दोनों ही विकास यात्राओं में मुख्यमंत्री ने प्रदेश भर का लम्बा दौरा किया। जंगलों, पहाड़ों, नदियों, घाटियों, गांवों, कस्बों और शहरों से गुजरती हुई दोनों यात्राएं आम जनता के दिलों तक पहुंचने में कामयाब हुई।

छत्तीसगढ़ के विकास पर मुझे गर्व होता है: श्री नरेन्द्र मोदी

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    विकास यात्रा 2013 के दौरान गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान में देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 18 मई को राजनांदगांव और यात्रा के समापन अवसर पर 07 सितम्बर को अम्बिकापुर (सरगुजा) आए थे। उन्होंने राजनांदगांव में एक विशाल जनसभा को सम्बोधित करते हुए कहा था- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह देश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री है, जो अपने पांच साल के कामकाज का हिसाब कड़ी धूप और तेज गर्मी में भी गांव-गांव जाकर जनता को दे रहे हैं। श्री मोदी ने डॉ. रमन सिंह को जनता के दिलों पर राज करने वाला लोकप्रिय, तेजस्वी और ऊर्जावान नेता बताते हुए कहा था- 21वीं सदी के भारत की तमाम समस्याओं के इलाज के लिए दो ही प्रमुख जड़ी-बूटियां हैं और वे हैं विकास और भरोसा। उन्होंने कहा था-छत्तीसगढ़ के विकास को देखकर मुझे गर्व होता है। यहां के मुख्यमंत्री बड़ी कुशलता और विनम्रता के साथ जनता की सेवा कर रहे हैं। उनकी वाणी में मुझे कभी कटुता नहीं दिखी। उनके विगत पांच साल की तुलना में वर्तमान पांच साल के कार्यकाल में विकास के सैकड़ों गुना ज्यादा काम हुए हैं और हो रहे हैं। यह देखकर मुझे गर्व होता है। मुझे गर्व है कि डॉ. रमन सिंह मेरे मित्र हैं। श्री मोदी ने सात सितम्बर को अम्बिकापुर में विकास यात्रा के समापन अवसर पर जनता को संबोधित करते हुए कहा था -  यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है कि उसे विकास को प्राथमिकता देने वाले मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. रमन सिंह का नेतृत्व मिला है, जो बिना किसी भेद-भाव के सर्वसमाज को साथ लेकर अपने राज्य की तरक्की और खुशहाली के लिए काम कर रहे हैं।
    श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 में केन्द्र में नई सरकार के गठन के बाद पूरे देश में समाज की अंतिम पंक्ति के लोगों और अंतिम छोर के गांवों तक विकास की रौशनी पहुंचाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण योजनाओं की शुरूआत हुई। इनमें प्रधानमंत्री जनधन योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, जीवन-ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य) और गरीब परिवारों की महिलाओं को रसोई गैस कनेक्शन के लिए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना विशेष रूप से उल्लेखनीय है। छत्तीसगढ़ में भी इन योजनाओं का क्रियान्वयन तेजी से हो रहा है और बड़ी संख्या में लोगों को इनका फायदा मिल रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में इस बार की विकास यात्रा में अधिक से अधिक संख्या में लोगों को इन योजनाओं का भी लाभ दिलाया जाएगा।

छत्तीसगढ़ में चौतरफा विकास-विश्वास का वातावरण: श्री लालकृष्ण आडवाणी

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    डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में वर्ष 2008 और वर्ष 2013 की विकास यात्राओं का शुभारंभ देश के उप-प्रधानमंत्री और तत्कालीन लोकसभा के नेता-प्रतिपक्ष श्री लालकृष्ण आडवाणी ने दंतेवाड़ा स्थित ऐतिहासिक दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ किया था। श्री आडवाणी ने 23 मई 2008 को दंतेवाड़ा में जनसभा को सम्बोधित करते हुए कहा था-छत्तीसगढ़ में पिछले साढ़े चार साल में गांव, गरीब और किसानों की बेहतरी के लिए अनेक कार्य हुए हैं। राज्य में चौतरफा विकास और विश्वास का वातावरण बना है। देश का यह नया राज्य बहुत जल्द भारत के मानचित्र पर सर्वाधिक खुशहाल और विकसित राज्य के रूप में अपनी नई पहचान बनाएगा। डॉ. रमन सिंह भारत माता और छत्तीसगढ़ महतारी के उन सपूतों के सपनों को भी साकार कर रहे हैं, जिन्होंने देश की आजादी और राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। श्री आडवाणी ने 9 मई 2013 को भी दंतेवाड़ा में राज्य सरकार की दूसरी विकास यात्रा का शुभारंभ किया था। उस समय उन्होंने विशाल जनसभा में कहा था-मुझे यह देखकर बहुत खुशी होती है कि डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में विगत एक दशक में आम जनता, विशेष रूप से अनुसूचित जातियों, जनजातियों और समाज के कमजोर वर्गों की बेहतरी के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं। विकास यात्राओं में जनता को इन योजनाओं के बारे में बताना और ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोगों को उनका लाभ दिलाना निश्चित रूप से एक सराहनीय पहल है।

हर मोर्च पर जनकल्याण की दिशा में कई बड़ी उपलब्धियां

    तीसरी विकास यात्रा के शुरू होने तक छत्तीसगढ़ ने विकास के हर मोर्चे पर जन-कल्याण की दिशा में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं, जिनकी एक लम्बी सूची है। बस्तर और सरगुजा में विश्वविद्यालयों और मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की गई रायगढ़ और राजनांदगांव में मेडिकल कॉलेज, बिलासपुर में केन्द्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना, दुर्ग में नये विश्वविद्यालय की स्थापना, अंजोरा में पशु चिकित्सा के क्षेत्र में कामधेनू विश्वविद्यालय की स्थापना, रायपुर में आयुष विश्वविद्यालय, नया रायपुर में अन्तर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आईटी) और भारतीय प्रबंध संस्थान की स्थापना इसका एक बड़ा उदाहरण है। प्रदेश की राजधानी रायपुर के विस्तार के रूप में नया रायपुर तेजी से आकार ले रहा है।

बेमिसाल तरक्की के चौदह साल

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    किसी भी राज्य अथवा देश के विकास का मूल्यांकन आंकड़ों से ही किया जा सकता है। आंकड़े बताते हैं कि डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने विगत चौदह वर्षों में वास्तव में जो तरक्की की है, वह बेमिसाल है। उनके ही नेतृत्व में छत्तीसगढ़ वर्ष 2008 में देश का पहला और इकलौता विद्युत कटौती मुक्त राज्य बना। विगत 14 वर्ष में बिजली का उत्पादन चार हजार 732 मेगावाट से बढ़कर लगभग 22 हजार 764 मेगावाट तक पहुंच गया। जिलों की संख्या 16 से बढ़कर 27, तहसीलों की संख्या 198 से बढ़कर 150, नगर निगमों की संख्या 10 से बढ़कर 12, नगरपालिकाओं की संख्या 28 से बढ़कर 44, नगर पंचायतों की संख्या 49 से बढ़कर 113 हो गई है। प्राथमिक स्कूलों की संख्या 14 हजार से बढ़कर लगभग 38 हजार, मिडिल स्कूलों की संख्या पांच हजार 642 से बढ़कर 16 हजार 674, हाईस्कूलों की संख्या 908 से बढ़कर दो हजार 643 और हायर सेकेण्डरी स्कूलों की संख्या 680 से बढ़कर तीन हजार 898 हो चुकी है। इस बीच शासकीय विश्वविद्यालयों की संख्या 3 से बढ़कर, सरकारी कॉलेजों की संख्या 116 से बढ़कर 221, कृषि महाविद्यालयों की संख्या 4 से बढ़कर 31, इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या 12 से बढ़कर 47, पॉलीटेक्निक संस्थाओं की संख्या 10 से बढ़कर 60 और आईटीआई की संख्या 61 से बढ़कर 178 तक और मेडिकल कॉलेजों की संख्या 2 से बढ़कर 9 तक पहुंच गई है। अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए आश्रम शालाओं और छात्रावासों की संख्या एक हजार 737 से बढ़कर 3 तीन हजार 252 हो गई है। स्वास्थ्य सुविधाओं में भी उत्साहजनक वृद्धि देखी जा रही है। उप-स्वास्थ्य केन्द्र तीन हजार 818 से बढ़कर पांच हजार 180 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र 512 से बढ़कर 792 और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र 114 से बढ़कर 156 हो गए हैं। प्रदेश की सिंचाई क्षमता 26.78 प्रतिशत से बढ़कर 34.20 प्रतिशत, ग्रामीण विद्युतीकरण 91 प्रतिशत से बढ़कर 99 प्रतिशत और बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 18 लाख से बढ़कर 42 लाख और प्रति व्यक्ति बिजली की औसत वार्षिक खपत 525 यूनिट से बढ़कर एक हजार 724 यूनिट तक पहुंच गई है। उचित मूल्य दुकानों की लम्बाई 8 हजार 637 से बढ़कर 12 हजार 298 हो गई है। वर्ष 2003 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत राज्य में केवल एक हजार 072 किलोमीटर सड़कें थी। आज यह बढ़कर 22 हजार 750 किलोमीटर तक पहुंच गई है।
     इस दौरान राज्य में पक्की सड़कों की लम्बाई 27 हजार किलोमीटर से बढ़कर 36 हजार किलोमीटर तक पहुंच चुकी है। खरीफ फसलों का रकबा 45.90 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 47.70 लाख हेक्टेयर और उद्यानिकी फसलों का रकबा 1.17 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 7.25 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया। वर्ष 2003 की स्थिति में राज्य के किसानों को सहकारी बैंकों से खेती के लिए 13 से 14 प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर अल्पकालीन ऋण मिलता था। आज की स्थिति में उन्हें ब्याज मुक्त ऋण दिया जा रहा है। विकास यात्रा सिर्फ महीने दो महीने नहीं बल्कि  प्रदेश के उज्जल और सुनहरे भविष्य के लिए निरंतर चलने वाली एक ऐसी यात्रा है, जो देश के नक्शे में छत्तीसगढ़ को सर्वाधिक विकसित राज्य और खुशहाल राज्य के रूप में पहचान दिलाने में निश्चित रूप से कामयाब होगी। (आलेख: स्वराज कुमार)

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