विशेष रिपोर्ट

वार्षिक वैश्विक लोकतंत्र सूचकांक में 10 पायदान खिसककर 42वें स्थान पर पहुंचा भारत

वार्षिक वैश्विक लोकतंत्र सूचकांक में 10 पायदान खिसककर 42वें स्थान पर पहुंचा भारत

मीडिया रिपोर्ट 

दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत वार्षिक वैश्विक लोकतंत्र सूचकांक में 10 पायदान खिसककर 42वें स्थान पर पहुंच गया है। रूढ़िवादी धार्मिक विचारधाराओं के बढ़ने और अल्पसंख्यकों व अन्य असहमत आवाजों के खिलाफ बढ़ती भीड़ की हिंसा को इसका कारण बताया गया है। अर्थशास्त्री खुफिया इकाई (ईआईयू) द्वारा संकलित इस सूचकांक में पिछले साल भारत 32वें स्थान पर था। हालांकि भारत पिछली साल की तरह ही अपूर्ण लोकतंत्र के वर्ग में बना हुआ है। इस सूचकांक में 165 स्वतंत्र देशों और दो भूखंडों को पांच श्रेणियों में सूचीबद्ध किया है। ये श्रेणियां चुनावी प्रक्रिया और बहुलवाद, नागरिक स्वतंत्रता, सरकार का कामकाज, राजनीतिक भागीदारी और राजनीतिक संस्कृति हैं। इस सूची को चार व्यापक वर्गों में बांटा गया है जो कि पूर्ण लोकतंत्र, अपूर्ण लोकतंत्र, मिश्रित लोकतंत्र और तानाशाही शासन हैं।

सूची में 21वां स्थान पर हासिल करने वाले अमेरिका सहित जापान, इटली, फ्रांस, इस्राइल, सिंगापुर और हांग कांग भी अपूर्ण लोकतंत्र वाले देशों के वर्ग में हैं। ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका पूर्ण लोकतंत्र वाले वर्ग से बाहर हो गया था। इस साल की रिपोर्ट में मीडिया की आजादी के अध्ययन में पाया गया है कि भारत में मीडिया अंशत: आजाद है। सूचकांक के अनुसार, भारत में पत्रकारों को सरकार, सेना तथा चरमपंथी समूहों से खतरा है। इसके अलावा हिंसा के जोखिम ने भी मीडिया की कार्यशैली को प्रभावित किया है।

यह है ईआईयू?

ईआईयू ब्रिटेन की दिग्गज मीडिया द इकोनॉमिस्ट ग्रुप की अनुसंधान एवं विश्लेषण शाखा है। इसका गठन 1946 में हुआ था।  सूची में टॉप-19 देशों को ही पूर्ण लोकतंत्र का दर्जा दिया गया है जिसमें नॉर्वे एक बार फिर से पहले स्थान पर काबिज है वहीं आइसलैंड और स्वीडन क्रमश: दूसरे व तीसरे स्थान पर हैं। 110वें स्थान वाले पाकिस्तान, 92वें स्थान वाले बांग्लादेश, 94वें स्थान वाले नेपाल और 99वें स्थान वाले भूटान को मिश्रित लोकतंत्र वाले वर्ग में रखा गया है। 

More Photo

    Record Not Found!


More Video

    Record Not Found!


Related Post

Leave a Comments

Name

Contact No.

Email