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कठुआ गैंगरेप: महीनों पहले से थी बच्ची के गैंगरेप और हत्या की प्लानिंग

कठुआ गैंगरेप: महीनों पहले से थी बच्ची के गैंगरेप और हत्या की प्लानिंग

मुफ्ती इस्लाह

कठुआ में आठ साल की बच्ची के साथ गैंग रेप और हत्या एक अलग तरह की घटना है. इससे पीछे घिनौना मकसद था. घटना को अंजाम देने वाले आरोपी अपनी ज़मीन से अल्पसंख्यक समुदाय को भगाना चाहते थे. कठुआ में गैंग रेप और हत्या को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया गया. बच्ची के साथ गैंग रेप और हत्या के लिए महीनों पहले प्लानिंग की गई थी. अपराधियों ने बचने के लिए अपराध की जगह को ध्यान से चुना ताकि किसी को कोई शक न हो. बाकरवाला समुदाय को ये संदेश देने की कोशिश की गई कि वो या तो वहां से भाग जाए या फिर अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे.

बच्ची की हत्या के बाद कानून की नजर से बचने के लिए हर संभव प्रयास किए गए. मसलन पैसा, पावर, राजनीति और धर्म, तमाम चीजें इस्तेमाल की गई. इतना ही मामले को सांप्रदायिक रंग देने में पुलिस, विधायक और मंत्रियों की मदद भी ली गई.

जम्मू कश्मीर पुलिस की अपराध शाखा ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में 15 पृष्ठों का आरोपपत्र दाखिल किया है. इसमें इस बात का खुलासा हुआ है कि बकरवाल समुदाय की बच्ची का अपहरण, बलात्कार और हत्या इलाके से इस अल्पसंख्यक समुदाय को हटाने की एक सोची समझी साजिश का हिस्सा थी.

क्राइम ब्रांच द्वारा दायर की गई चार्जशीट में कहा गया है कि पूर्व राजस्व अधिकारी संजी राम ने पुलिसकर्मियों को मामला दबाने के लिए 1.5 लाख रुपये की रिश्वत भी दी. इतना ही नहीं मामले को रफा दफा करने के लिए बीजेपी के विधायकों और वरिष्ठ मंत्रियों के अलावा महबूबा मुफ्ती सरकार पर दबाव डाला गया.

क्राइम ब्रांच के खिलाफ हिंदू एकता मंच ने खुलेआम लोगों का समर्थन हासिल करने के लिए तीरंगे का इस्तेमाल किया. आरोपपत्र के मुताबिक आरोपी ने बच्ची को देवीस्थान में बंधक बनाए रखने के लिए उसे अचेत करने को लेकर नशीली दवाइयां दी थी. बच्ची के अपहरण, हत्या और जंगोत्रा एवं खजुरिया के साथ उसके साथ बार-बार बलात्कार करने में किशोर ने मुख्य भूमिका निभाई. किशोर अपनी स्कूली पढ़ाई छोड़ चुका है.

आरोपपत्र के मुताबिक खजुरिया ने बच्ची का अपहरण करने के लिए किशोर को लालच दिया. खजुरिया ने उसे भरोसा दिलाया कि वह बोर्ड परीक्षा पास करने ( नकल के जरिए ) में उसकी मदद करेगा. इसके बाद उसने परवेश से योजना साझा कर उसे अंजाम देने में मदद मांगी , जो राम और खजुरिया ने बनाई थी.

जंगोत्रा अपने चचेरे भाई का फोन आने के बाद मेरठ से रासना पहुंचा और किशोर एवं परवेश के साथ बच्ची से बलात्कार किया. राम के निर्देश पर बच्ची को मंदिर से हटाया गया और उसे खत्म करने के इरादे से मन्नू , जंगोत्रा तथा किशोर उसे पास के जंगल में ले गए.

10 जनवरी को साजिश के तहत नाबालिग ने मासूम बच्ची को घोड़ा ढूंढने में मदद की बात कही. वो उसे जंगल की तरफ ले गया. बाद में बच्ची भागने की कोशिश की लेकिन आरोपियों ने उसे धर दबोचा. इसके बाद उसे नशीली दवाएं देकर उसे एक देवी स्थान के ले गए, जहां रेप किया.

शव का पता चलने के करीब हफ्ते भर बाद 23 जनवरी को सरकार ने यह मामला अपराध शाखा को सौंपा जिसने एसआईटी गठित की.

आरोपपत्र में कहा गया है कि जांच में यह पता चला कि जनवरी के पहले हफ्ते में ही आरोपी सांझी राम ने रासना इलाके से बकरवाल समुदाय को हटाने का फैसला कर लिया था जो उसके दिमाग में कुछ समय से चल रहा था.

जांच से इस बात का खुलासा हुआ है कि सांझी राम ने मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों को चार लाख रुपये तीन किश्तों में दिए. जांच में इस बारे में ब्योरा दिया गया है कि आरोपी पुलिस अधिकारियों ने मृतका के कपड़े फारेंसिक प्रयोगशाला में भेजने से पहले उसे धोकर किस तरह से अहम सबूत नष्ट किए और मौके पर झूठे साक्ष्य बनाए.

जांच के दौरान यह भी पता चला कि राम रासना, कूटा और धमयाल इलाके में बकरवाल समुदाय के बसने के खिलाफ था. वह हमेशा ही अपने समुदाय के लोगों को इस बात के लिए उकसाता था कि वे इन लोगों को चरागाह के लिए जमीन मुहैया न करें, या उनकी कोई मदद न करें.

मामले को लेकर मुख्यमंत्री मेहबूबा मुफ्ती पर चौतरफा हमले हो रहे हैं. वो दोनों बीजेपी के मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रही, जो आरोपी को बचाने की रैली में शामिल हुए. उन्होंने कहा है कि न्याय मिलेगा. लेकिन अब लोगों को उनके बयान की नहीं बल्कि एक्शन की जरुरत है.

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