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गुजरात दंगे- 2002 के आइकॉनिक चेहरे, माथे पर भगवा पट्टी लपेटे अशोक परमार और रोते हुये हाथ जोड़े कुतुबुद्दीन अंसारी

गुजरात दंगे- 2002 के आइकॉनिक चेहरे, माथे पर भगवा पट्टी लपेटे अशोक परमार और रोते हुये हाथ जोड़े कुतुबुद्दीन अंसारी

पूर्व न्यायाधीश- प्रभाकर ग्वाल की फेसबुक वॉल से...

गुजरात : माथे पर भगवा पट्टी लपेटे अशोक परमार और रोते हुये हाथ जोड़े कुतुबुद्दीन अंसारी , दोनों गुजरात दंगों (2002) के आइकॉनिक चेहरे रहें हैं।

अशोक परमार को तब समझ नहीं थी तो वह साम्प्रदायिक और फासिस्ट वादियों का क्रूरतम मोहरा बना हुआ था । 
अशोक परमार दंगाइयों का पोस्टर ब्वाय बना हुआ था उसके दोनों हाथों में तलवारें थी । 
उस आधार पर अशोक परमार पर मुकदमा चला और धूर्त्त संघियों ने आंखें फेर ली थी । 
सजा काटते हुए अशोक परमार को नेताओं इस दोगलेपन ने आत्ममंथन करने को विवश किया ।

दंगाइयों ने जब कुतुबुद्दीन अंसारी को घेर लिया तब उसने रोकर गिड़गिड़ाकर अपनी जान बचाई थी संघियों ने तथाकथित हिंदूत्ववादी बहादुरी बखान करने हेतु इसका भी फोटो खींचा और प्रकाशित किया गया था।

इतने वर्षों बाद जब अपना अतीत देखते हैं तो दोनों गले लगकर रो देते हैं ! 
कुतुबुद्दीन ने जब अपनी पुस्तक का विमोचन किया तो अशोक को बुलाया और जब अशोक परमार ने जूते की दुकान खोली तो उसका उद्घाटन करने के लिए कुतुबुद्दीन अंसारी को बुलाया ! 

आज दोनों ने अतीत को पीछे छोड़ और सबक लेकर एक नई जिंदगी शुरू कर दी है . . .
नेताओं की सरकारें बन जाती हैं, उनके बच्चे विदेश पढ़ने चले जाते हैं, लौटते ही विरासत में कुर्सी तैयार . . .
पार्टी चाहे बीजेपी हो या कांग्रेस हो या कोई और . . . नफ़रतों की आग में झुलसते आम आदमी ही हैं ! 
काश, आज के युवा वर्ग यह समझ पाते 
छोड़ेंगे या किसी को छुड़वाएँगे जी आरएसएस, कांग्रेस, भाजपा को?

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