सूरजपुर

प्रतापपुर - अम्बिकापुर मार्ग निर्माण में भ्रष्टाचार और अनिमियता को लेकर चक्का ज़ाम !

ठेकेदार हैं कि सुनते नहीं,सड़क विकास निगम के अधिकारी ने चक्का जाम में कहा
पेटी कांट्रेक्टर को हटा मूल ठेकेदार से काम कराने की दी जानकारी
प्रतापपुर अम्बिकापुर सड़क निर्माण में अनियमितता और धूल सहित अन्य मांगों को लेकर हुआ चक्का जाम

प्रतापपुर। सड़क विकास निगम द्वारा कराए जा रहे अम्बिकापुर प्रतापपुर मार्ग के निर्माण में व्यापक अनियमितता और धूल से परेशान ग्रामीणों ने पम्पापुर चौक के पास चक्का जाम किया,इस दौरान विभाग के एपीएम ने पेटी कांट्रेक्टर को हटाते हुए मूल ठेकेदार से काम कराने की जानकारी दी। एपीएम द्वारा यह कहने पर कि ठेकेदार उनकी बात नही सुनता,एसडीएम रवि सिंह ने नाराजगी व्यक्त करते हुए सभी मांगों पर उनसे लिखित प्रतिवेदन लिया तथा बुधवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक रखने की बात कही। इस दौरान ग्रामीणों ने एसडीएम को महान नदी पर सेतु निगम द्वारा बनाये गए रपटा निर्माण में धांधली और कच्चा रपटा के लिए दिए दस लाख वापस न करने और ह्यूम पाईप ले जाने की शिकायत लिखित में करते हुए स्वतन्त्र एजेंसी से जांच की मांग की।

                गौरतलब है कि प्रतापपुर से अम्बिकापुर जाने के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण सड़क तो है ही,इस मार्ग में संभाग के सबसे बड़ा उद्योग शक्कर कारखाना और महान दो कोयला खदान भी है,भविष्य में महान तीन और चार भी खुलनी है लेकिन सबसे बदहाल यही सड़क है। कई वर्षों की मांग के बाद सरकार ने करीब नब्बे करोड़ की लागत से इस सड़क के निर्माण की स्वीकृति देते हुए इसके निर्माण का जिम्मा सड़क विकास निगम को सौंपा है जिसका ठेका बाहर की एक कम्पनी को दिया गया है। इसके निर्माण में सबसे बड़ी दिक्कत है कि मुख्य ठेकेदार ने इसके निर्माण के लिए पेटी में अम्बिकापुर के एक ठेकेदार को दे दिया है जिसके बाद से निर्माण की गुणवत्ता और समय पर काम पूरा होने को लेकर संदेह उत्पन्न होने लगा था और स्थिति भी यही हो रही है जिसे लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश पनपने लगा था क्योंकि कई मांगों और शिकायतों के बाद न धूल से निजात मिल रही थी और न काम में सुधार हो रहा था। जिसके बाद ग्रामीणों ने पम्पापुर चौक में चक्का जाम करने का ज्ञापन एसडीएम प्रतापपुर को सौम्पा था और आज तय कार्यक्रम के अनुसार प्रातः ग्यारह बजे चक्का जाम प्रारम्भ हुआ,जाम प्रारम्भ होते सड़क के दोनों ओर गाड़ियों की लंबी लाइन लग गयी थी। इसके कुछ देर बाद एसडीएम प्रतापपुर रवि सिंह मौके पर पहुंच गए थे जिसके बाद सड़क विकास निगम के एपीएम पीके श्रीवास्तव और गावर कंपनी के कर्मचारी भी वहां पहुंच गए। ग्रामीणों ने इनके सामने अपनी बात रखी और धूल से मुक्ति के साथ उच्चस्तरीय निर्माण की मांग की,सड़क विकास निगम के एपीएम ने उन्हें समझाने का प्रयास किया किन्तु ग्रामीण नहीं माने और मांगों को लेकर लिखित आश्वासन मांगा। उन्होंने कल्याणपुर के पास घटिया गिट्टी डालने की बात उठायी जिस पर एसडीएम रवि सिंह के समक्ष एपीएम ने कहा कि ठेकेदार उनकी बात नहीं सुनता जिस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए एसडीएम ने सभी मांगों और निर्माण कार्य में सुधार को लेकर लिखित आश्वासन देने एपीएम से कहा। जिसके बाद एपीएम श्रीवास्तव ने लिखित में बताया कि ओएटी कांट्रेक्टर प्रकाश राय को कार्य से हटा दिया गया है और अब काम गांवर कम्पनी स्वयं कर रही है। साथ ही उन्होंने लिख कर  दिया कि कल्याणपुर के पास में डाली गई घटिया गिट्टी हटाई जाएगी,सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे,सड़क के किनारे से मलवा हटाने,नियमित पानी पटाने,रपटा के पास सप्ताह में दो दिन ग्रेडर चलाने,खेतों से बोल्डर हटाने की बातें लिख कर दी। ग्रामीणों ने मांग की कि सम्बन्धित अधिकारी कैम्प लगाकर केरता के पास रहे ताकि नियमित देख रेख हो सके क्योंकि कोई भी अधिकारी यहाँ नहीं आता और ठेकेदार अपनी मर्जी से मनमाना काम कर रहा है जिसके बाद एसडीएम के निर्देश पर एपीएम ने लिख कर दिया कि प्रत्येक तीन दिन बाद कार्य प्रोग्रेस रिपोर्ट जमा करेंगे। एपीएम द्वारा लिखकर देने तथा बुधवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पुनः बैठक की बात एसडीएम रवि सिंह द्वारा काहे जाने के बाद चक्का जाम समाप्त हुआ।इस दौरान अनुज प्रताप सिंह,राकेश मित्तल,अभय गुप्ता,राजेश केहरी, विशाल गुप्ता,संतोष यादव,संतोष टोप्पो,महेश सोनी,योगेंद्र ठाकुर,श्यामलाल मानिकपुरी,अनिल सोनी,दीपक जायसवाल,रितेश सांडिल्य,राहुल दास, विमलेश मिंज सहित अन्य ग्रामीण व पुलिस बल मौजूद था।

रपटा निर्माण की होगी जांच, एसडीएम को मौके पर दी शिकायत

चक्का जाम के दौरान ग्रामीणों ने महान नदी पर करीब तीन करोड़ की लागत से बने रपटा में अनियमितता और जांच के बाद भी कुछ नहीं होने का मुद्दा उठाया,मौके पर उपस्थित सेतु निगम के एसडीओ व अन्य ने मामले में गुमराह करने का प्रयास किया जिस पर वहां तनाव की स्थिति निर्मित हो गयी। जिसके बाद एसडीएम ने ग्रामीणों से लिखित शिकायत देने कहा और आश्वस्त किया कि कलेक्टर के निर्देश पर स्वतन्त्र
एजेंसी से जांच कराई जाएगी। शिकायत में ग्रामीणों ने कम काम के बाद भी पूरा भुगतान और घटिया निर्माण का मुद्दा उठाया। उन्होंने आवेदन में शक्कर कारखाना को अब तक सेतु निगम द्वारा कच्चा रपटा निर्माण का दास लाख रुपये न लौटाने तथा यहां के ह्यूम पाईप उठा कर ले जाने का मामला भी उठाया जिसकी जांच का आश्वासन भी एसडीएम ने दिया। इस दौरान सेतु निगम के एसडीओ ने बताया कि महान नदी पर बड़े पूल की स्वीकृति इस बजट सत्र में मिलने की उम्मीद है जिसके लिए करीब पंद्रह करोड़ का स्टीमेट बनाकर शासन को दिया गया है।

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